अणुव्रत राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मलेन का भव्य आयोजन

नई और पुरानी पीढ़ी के सैकड़ों लेखकों से खचाखच भरा हुआ एनडीएमसी का कंवेन्शन हॉल 9 जुलाई को राष्ट्रीय अणुव्रत साहित्यकार सम्मेलन का साक्षी बना। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर वित्त राज्य मंत्री, भारत सरकार व अणुव्रत महासमिति के संरक्षक अर्जुनराम मेघवाल मौजूद थे। वित्त राज्य मंत्री के अलावा विशिष्ट अतिथि के रूप में नेशनल बुक टस्ट के चेयरमेन डॉ बलदेव भाई शर्मा थे और कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय भाषा सम्मेलन व भारतीय विदेश नीति परिषद के डॉ वेद...

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अणुव्रत महासमिति

भारतीय जनतंत्र की उदयवेला, साम्प्रदायिक कट्टरता की आग एवं बढ़ते अनैतिक मूल्यों के दौर में अणुव्रत आंदोलन प्रवर्तक आचार्य तुलसी द्वारा उद्बोधित अणुव्रत आंदोलन के कार्य को सुयोजित करने की दिशा में अप्रैल,1950 में अणुव्रत समिति का गठन हुआ। इसकी संस्थापना में सर्वश्री जयचंदलाल दफ्तरी, देवेन्द्रकुमार कर्णावट सुगनचंद आंचलिया, मोहनलाल कठोतिया, हनूतमल सुराणा, पारस भाई जैन एवं डॉ. मूलचंद सेठिया योगभूत बने जो अणुव्रत समिति के संस्थापक थे।

अणुव्रत समिति के गठन का मुख्य उद्देश्य था-अणुव्रत दर्शन के अनुरूप व्यक्ति-निर्माण एवं समाज-निर्माण करते हुए अहिंसक समाज संरचना का प्रयास एवं तद्नुरूप प्रचार.प्रसार एवं अन्यान्य अपेक्षित साधनों द्वारा अणुव्रत आंदोलन को गतिशील बनाना। अणुव्रत आंदोलन

संदेश

विश्व क्षितिज को अध्यात्मिक आलोक प्रदाता लोक महर्षि आचार्यश्री महाश्रमण इक्कीसवीं सदी के महान समाज सुधारक है। ‘संयम ही जीवन है’ उद्घोष को मुखरित करने वाले अणुव्रत आंदोलन को आप अणुव्रत अनुशास्ता के रूप में कुशल नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं।

 

आपका जन्म 13 मई 1962 को राजस्थान के सरदारशहर कस्बे में हुआ एवं 5 मई 1974 को दीक्षित हुए। एक धर्म संप्रदाय के आचार्य होते हुए भी आपके विचार असम्प्रदायातीत है। अहिंसा और नैतिकता की प्रतिष्ठापना के लिए आप सतत् संलग्न है। मानवीय मूल्यों के पुर्नस्थापना एवं कल्याण के फौलादी संकल्प के साथ 30,000 किलोमीटर की आप द्वारा की गई पद्यात्राएं आपके परम पुरुषार्थ की परिचायक है।

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